----------और तथाकथित देशभक्त बुद्धिजिवियो को खटमल काटने लगा-----
जम्मू-कश्मीर &लद्दाख
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भारत विश्व में एक पुरातन , गौरवशाली , लोकतंत्र का सुन्दर- सुखद, देश है नि:संदेह ---
तभी तो देश की आम भावना जो देश हित के पक्ष मे होता है, देश के अमन चैन के लिए जरूरी सुधारात्मक कदम होता है ,
उसके खिलाफ भी हमारे यहाँ "टुकङे टुकङे गैंग& हर घर से अफजल निकलेगा गैंग" जैसे देश विरोधी गैगस्टर अपनी उन्मादी स्वर जगजाहिर करता है,
और हमारा लोकतंत्र मुकदर्शक बना रहता है,
इसके विरोध में कोई भी कार्यवाही हुयी की अखिल भारतीय स्तर पर तथाकथित बुद्धिजीवियों को खटमल काटने लगता है,खुजली खुजलाने लगता हैऔर ---- लोकतंत्र की हत्या हो रही है, मनवाधिकार शर्मसार हो रहा है ---
जैसे आवाज गूँजने लगता है ,
और हम आम जन जिसे अपने कमाने खाने के सिवाय ऐसे किसी वारदात से कोई वास्ता ही नहीं होता है
वह भी दिगभ्रमित हो जाता है और इस लोकलुभावन नारे के पक्षधर हो कर सरकार को कोसते हैं ।
अनुच्छेद 370&35 का विलोपन एक सुधारात्मक कदम है जो उस प्रांत के अमन चैन और शाँति बहाली हेतु ना केवल प्रभावी बल्कि बहुत ही महत्वपूर्ण साबित होने जा रहा है--,
अब भारत में रहकर इस सुधारात्मक कदम का विरोध के भी कयी मायने स्पष्ट हो रहें हैं---
काँग्रेस सहित अन्य कुछ राजनीतिक दल सरकार के हर अच्छे बुरे काम का विरोध करना अपना मुलभूत कर्तव्य समझती है,
जनता बदल चूकी है--- तेजी से घटते हुए इन राजनीतिक पार्टी के जनाधार को व्यापक रूप से देखा जाय तो जागरूक जनता देशहित के हर काम की प्रशंसा की अपेक्षा विपक्षी पार्टियों से भी करती है , लेकिन इस बात को कबुल करना इन पार्टियों को स्वीकारनीय नहीं होता है ,
ना नुकूर और आधे मन से या फिर कभी हाँ कभी ना वाली सोच से इसे निकल कर इसे स्वस्थ और पक्के राजनीतिज्ञ के रूप में अपनी पहचान बनाना ही होगा समय की यही माँग है ।
जम्मू-कश्मीर के विवाद हेतु नेहरूजी को जिम्मेदार ठहराने से पहले हमें समकालीन भारत की आर्थिक स्थिति , राष्ट्रीय और अन्तराष्ट्रीय परिस्थितियों की समझ अवश्य विकसित करनी चाहिए ,समकालीन परिस्थितियों में संभवतः देश के लिए उस प्रकार की परिस्थितियों को स्वीकार करना ही बुद्धिमानी था ,।
आज देश के पास आदरणीय मोदी -शाह-ङोभाल जैसी त्रिरत्न की जोङी हैं , प्रशंसनीय और बेहतरीन आपसी समन्वय है, जो किसी भी देश के राजनीतिक इतिहास में सैकड़ो हजार साल में ही एकाध बार दिखायी देता है
और इसी प्रकार के जोश और उमंग से लबरेज आपसी समन्वय पर देश के विकास के लिए हर चुनौती का सामना करते हुए हर असंभव काम को संभव करता हुआ चलते रहता है
नित्य नये आयाम स्थापित करते रहते हैं ।
कोई भी संप्रभु राष्ट्र यह सहजता से कैसे स्वीकार कर सकता है----
एक राष्ट्र दो झंङे
एक राष्ट्र दो संविधान ,दो कानुन
अगर हमारे देश ने कभी इसे विवशता वश स्वीकार कर लिया तो यह तत्कालीन लाचारी रही होगी आज तो हम ससक्त भारत एक भारत नेक भारत की छवि विश्व को दिखा रहे हैं ।
हम हरेक भारत वासी का छाती गर्व से उँचा होना ही चाहिए जब हमारे यशस्वी गृह मंत्री सासंद सत्र में चिघ्घाङते हुए विश्व समुदाय तक आवाज रखते हैं---
कि अक्शाई चिन और पाक अधिकृत कश्मीर का भू भाग हमारा है हम इसे हर हाल में ले कर रहेंगे ,।
अगर यह बात कहते सुनते किसी को गर्व का एहसास नहीं हो पा रहा हो तो शायद उनके देशभक्ति में ही खोट है
****जय हिन्द---जय भारत********
आदरणीय की रचना प्रेरणादायिनी है सर्वदा की भाँति
ReplyDeleteबहुत-बहुत धन्यवाद् पाठक बाबा
ReplyDeletewow real, this is fact what u said
ReplyDeleteHeartily thanks
DeleteI don't agree with something
DeleteIts my opinion, may be differ with someone,
DeleteWith warm respect