कहानी
*कर्मयोगी*
सौम्या अपने दैनिक दिनचर्या से परेशान हो चुकी थी। करीब करीब हर रोज उनके घर पार्टी सार्टी का आयोजन होते रहता था। उनके पति श्री मान् अभिनंदन को दोस्तों के साथ गप्पें लड़ाना और चटकदार भोजन करना पसंद था और पसंद था दोस्तों के मुंह से सुनना -- वाह अभिनंदन जी कमाल का पार्टी डन किये हैं आप, आप का कोई जोड़ नहीं।
इसी सिलसिले मे एक दिन सौम्या बोल पड़ी -- अब ये हरकतें बंद भी करो यार अभिनंदन। कब तक युं ही पैसे उड़ाते रहोगे। कुछ तो परिवार के लिए भी सोचो। दोस्तों को लाखों लाख रूपयै व्यापार मे सहयोग के लिए दे दिये हो, उस पैसे का कुछ भी हिसाब किताब नहीं, और इधर पार्टी सार्टी बढ़ती जा रही है।
ऐ मेरी देवी सौम्या -- जब तक तु है न तब तक ये पार्टी बंद न होगी। तेरे हाथों की ये लजीज व्यंजन चिकेन- पकौड़ा, पनीर- चिली, बाटी - चोखा, चिकेन- चिली, के जो स्वाद हैं वो ही मेरे नशा की आदत है देवी जी ये न छुटेगा --हुकूम करो देवी इस दुनिया में जो तुझे पसंद हो वही तेरे दरवाजे पर होगा पर ये पार्टी और ये दोस्त और तेरे हाथों की बनी ये चटकदार भोजन का मैं गुलाम हूँ देवी जी हुकूम हो जो कहोगे वो पुरा होगा पर ये बंद न होगा।
बेचारी सौम्या क्या करे--?
मर्द को अगर किसी औरत का दिल जितना हो उनसे बात मनमानी हो तो मर्द के तेवर अक्सर निसफल हो जाते हैं। लेकिन हर इंसान को अपने बड़ाई सुनने की भुख सी होती है और ये भुख हरपल बनी रहती है --
आप अजमाईश करके देखिए अपने अपने घर में अपेक्षा से भी बढ़कर आपको समर्पण मिलेगा । लेकिन खब्बरदार सावधान --! यह बड़ाई करने वाली अजमाईश घर से बाहर अगर करने लगिऐगा तो भयंकर दुष्परिणाम भी मिल सकते हैं -?इसके जिम्मेदार आप स्वयं होंगे।
बस सौम्या भी इस नियम की अपवाद न थी। और हर औरत की यह कामना होती है , कि पति परमेश्वर उनके कार्यों की तारीफ करे बस जिनको भी ये नसीब हुआ हो वह आधी पेट भोजन करके भी दुनिया का बहुत ही सौभाग्यशाली अपने आप को समझती है और खुश रहती है और इसके उलट जो भी पति श्री मान् अपने पत्नी के कामों मे हर समय खोट निकालते रहता है उसको नरक का दर्शन हर रोज होता है और दे दंगल उसका भाग्य बन जाता है।
खैर सौम्या चटकदार भोजन बनाती रही पार्टी चलता रहा और अभिनंदन अपने दोस्तों में बाह बाही पाते रहा।
समय के कुचक्र ने अपना रूप दिखाया --दुनिया की सच्चाई से सौम्या का सामना हुआ। एक रात हाईवा और ईनोभा के टक्कर मे अभिनंदन का अभिनंदन बैकुंठ लोक मे हो गया। सौम्या अपने बच्चों के साथ इस भीड़ भरे संसार मे अकेली हो गयी। कभी इस दरवाजे पर दोस्तों के ठहाके की शोरगुल हुआ करता था, जो कि अब विरान हो गया। अभिनंदन के सभी दोस्तों ने अभिनंदन के बारहवीं कर्म संस्कार बाद इस घर का खोज खबर लेना बंद कर दिया।
लोग कहते हैं नमक खाने वाला व्यक्ति , नमक का कर्ज अदा करता है, आजीवन वफादार है , लेकिन यहाँ तो बारह दिन बाद ही अनजान बन गये वो सभी नमक के खादुक - अभिनंदन के तथाकथित मित्र। सौम्या ने अपने पति के दोस्तों से उन रूपयों को मांगना शुरू किया, लेकिन अब इनका फोन ब्लाक कर दिया गया। फोन नहीं उठाया जाने लगा।
सौम्या नाम के अनुकूल सौम्य विचार की थी। अपने दिवंगत पति के मुंह से सुने बड़ाई के शब्द और अपना संबोधन 'देवी जी' उसके लिए हौसलाप्रद करने वाले अनमोल शब्द थे। सौम्या ने विविध प्रकार के आचार बनाकर आनलाईन बेचना शुरु किया। और फिर मुरब्बा - नमकीन, मिक्सर, दालमोट , चिप्स -पापड़ जैसे अनेकों व्यंजन बनाकर आनलाईन कारोबार शुरू कर लिया। शुरूआती कुछ कठीनाई के बाद अब सौम्या ने एक कंपनी स्थापित कर लिया 'सौनंदन' नाम से। अब इस कंपनी का अपना ट्रेडमार्क था, अलग अलग उत्पाद के अलग अलग उत्पाद प्रबंधक थे, कंपनी के अंतर्गत बाजार विपणन इकाई अलग थी।
आज लगभग छह साल बाद कंपनी के कर्मचारियों की सख्या प्रत्यक्ष रूप से पांच सौ से उपर थी। कंपनी का सलाना टर्न ओभर पांच सौ करोड़ से उपर का हो चुका था। कंपनी'सौनंदन' एक देशव्यापी भरोसेमंद ब्रांड बनकर उभर रहा था।
सौम्या अपने आफिस में बैठे जरूरी निर्देशों को आनलाईन कर रही थी। कर्मचारियों में दीपावली तोहफा बांटने हेतु सभी कर्मचारियों के घर आवश्यक रूप से एक बढ़िया सा मिठाई का पैकेट पहुंचवाने कि जिम्मेदारी और ये अतिरिक्त तोहफा के रूप मे हो ये सुनिश्चित करने को कंपनी के मुख्य प्रबंधक एम पी खुराना को कहा जा रहा था।
तभी आदेशपाल हाथ मे एक पर्ची लिये आया और बोला कि मैम साहिबा कोई आपसे मिलना चाह रहा है। सौम्या उस पर्ची मे लिखे आदमी को नाम से पहचान न पायी। सौम्या की सहमति मिलते ही वह आदमी सुरक्षा चेक होने के बाद अंदर आया और वह आदमी गिडगिडाते स्वर मे बोल पड़ा-- भाभी मुझको माफ कर दिजिए। मै आज परेशान हूँ, मुझे काम पर रख लिजीए । मैने आपके हाथों बनाया भोजन अभिनंदन के साथ अनेकों पार्टी मे खाया है।
सौम्या पहचान गयी, कि ये आदमी नहीं गिरगिट सा रंग बदलने वाला धोखेबाज पलटु राम लोग हैं। सौम्या बोल पड़ी --- अब कोई रहम हो न सकेगा --? और ईशारा पाकर सुरक्षा वाले गार्ड उनको घसीटते हुए आफिस केबिन से बाहर ले जाने लगे , और इसी समय सौम्या पलटकर दीवार पर लगी अभिनंदन की बडी़ सी तस्वीर जो फुलमाला से सुशोभित था को देखने लगी और ऐसा लग रहा था मानिए सौम्या के कामों पर अभिनंदन मुस्कान के साथ बोल रहा हो -ठीक ही तो कर रहे हो देवी जी --!
धन्यवाद।
©®पवन मिश्रा (दुमका - झारखंड)
21नवंबर 2024