Friday, September 10, 2021
तालिबान -अफगानिस्तान के प्रसंग में सशंकित हिन्दुस्तान
Sunday, June 13, 2021
पंजे का भगवाकरण---?
पंजे का भगवाकरण
बदलते समय के साथ हर वो चीज बदलते जाता है जो समय और सभ्यता के साथ अपनी तारतम्यता बनाये रखना चाहते हैं। आपको अगर परिवेश में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करानी है तो परिवेश के अनुसार अपने आपको ढालना होगा अपने आपको उसके अनुकूल बदलना होगा अन्यथा परिदृश्य से आप स्वत: गायब
होते चले जायेंगे और जल्द ही विलुप्तप्राय तथ्यों की श्रेणी में गिने जायेंगे।
पिछले कई घटनाक्रमों ने यह बात व्यापक चर्चा का विषय बना दिया है ,कि क्या सन् 1885 में स्थापित कांग्रेस अपने मौलिक तथ्यो से भटक गयी है---? एक एक करके मजबूत और व्यापक जनाधार वाले नेता अगर अपने घर को छोड़ , अपने पार्टी को छोड़ किसी और राजनीतिक छत्रछाया में चले जा रहे हों या धुर विपक्षी खेमा के नेताओ का महिमा मंडन करने लगे, सत्ता पक्ष की नीतियां जो कुछ समय पहले तक जन विरोधी रूप में प्रसारित किया जा रहा था और अचानक से उन्हीं नीतियों का महिमा मंडन किया जाने लगे तो संशय और आका के नेतृत्व संचालन पर प्रश्नचिन्ह उठना लाजमी होता है।
इसी क्रम में जी -23 जो तथाकथित गांधीजी के अनुयायीयों या कांग्रेस आलाकमान के विरोध में नेतृत्व क्षमता पर प्रश्न चिह्न खड़ा करने वाले वरिष्ठ कांग्रेसी जनों के 23 सदस्यों का समूह जो आलाकमान को पत्र के मार्फत कोर नेतृत्व सहित अनेक मुद्दों पर व्यापक बदलाव की महती आवश्यकता को रेखांकित कराया था, पर एक ध्यान देने की आवश्यकता है।
आजादी के बाद से सन् 2014 तक अधिकांश समय तक कमोबेश कांग्रेस ही जनता के लिए सत्ता संचालन हेतु एक मात्र विकल्प था । फिर इतने लंबे समय तक सत्ता संचालन करने वाला राजनीतिक दल अचानक से आज इस स्थिति में कैसे पहुंच गया कि अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष का न तो जनतांत्रिक व्यवस्था से चुनाव करा पा रहा है , और न ही विपक्षी दल के नेता के रूप में देश के सामने कोई अपेक्षित अहर्ताधारी नेता दे पा रहा है --? इस सवाल के ज़बाब पाने की तिलमिलाहट जिन जिन कांग्रेसियों ने व्यक्त कर पाया उनके आवाज को नजरंदाज करने का प्रयास किया गया और उसे राजनीतिक षडयंत्र के तहत उनका राजनीतिक ओहदा बौना कर दिया गया , उनके राजनीतिक मंसूबों के पर कतर दिये गये।
काश कि कांग्रेसी आलाकमान यह समझ पाते की जिस कर्मठ नेताओं ने अपने छात्र जीवन से संघर्ष की मजबूत गाथा के साथ अपने जीवन के संपूर्ण समय को कांग्रेसी महल के चौखट को चमकाने में बिताया है आज उसे आलाकमान के नजर अंदाज करने और मांग पर मौन प्रतिक्रिया से तंग आकर अपने आपको वो कांग्रेस से स्वत: छुट्टी कर लें रहे हैं ,रोशनदान से आ रहे रौशन के किरण को आलिंगन कर रहे हैं उस और दौड़ रहें हैं, इसके पिछे कुछ तो मौलिक कारण रहे होंगे ।
इसी जी --23 में एक सदस्य , जो राहुल गांधी के काफी करीबी थे और कोर कमेटी के पुनर्गठन हेतु लंबे समय से अनुरोध कर रहे थे ,ने बार बार अपने मांग को ठुकराने पर तथा निरंतर लल्लो चप्पो की राजनीति को तरजीह मिलता देख , जतिन प्रसाद ने तंग होकर कांग्रेस छोड़ दिया और बीजेपी ज्वाइन कर लिया। जतिन प्रसाद ने बी जे पी को एक अनुशासित और योग्य शिर्ष नेतृत्व के संचालन में योग्यता , क्षमता और उत्पादक्ता देने वाले कार्यकर्ता को उपयुक्त ओहदा देने वाले पार्टी के रुप में पहचाना।
जतिन प्रसाद जी जैसे कर्मठ और महत्त्वकांक्षी जन इस प्रकार के घटनाक्रम के अकेला उदाहरण नहीं हैं, एक लंबी मानव श्रृंखला सी है जो कांग्रेस या अन्य पार्टियों को छोड़कर बी जे पी ज्वाईन कर ली है , इन्हें अपना भविष्य और कुछ स्वतंत्र होकर काम करने की आजादी यहां दिखती है। जैसे -- एस एम कृष्णा ( पूर्व विदेश मंत्री सह वरिष्ठ कांग्रेसी), ज्योतिरादित्य सिंधिया, चौधरी बिरेंद्र सिंह, संजय सिंह , राधाकृष्ण बिखे पाटिल , नारायण राणे, टाम वडक्कन, हेमंत विश्वा शर्मा,, विजय बहुगुणा ,शंकर सिंह वाघेला, रीता बहुगुणा जोशी, नारायण राणे , राव इंद्रजीत सिंह जैसे अनेकों प्रशंसनीय राजनेता हैं जो किसी न किसी कारण अपने पार्टी को छोड़कर अपने आपको भगवा रंग में रंग लिया ।
शिर्ष नेतृत्व द्वारा हर अच्छे और जनोपयोगी नीतियों का विरोध करना कभी भी विवेकशील राजनेताओं को तार्किक रूप से रुचीकर नहीं हो सकता है । अब कांग्रेस के वरिष्ठ और पुराने राजनेता जो सोनिया गांधी के बहुत करीबी माने जाते हैं -- दिग्विजय सिंह का बयान आना कि कांग्रेस अगर सत्ता में आती है तो जम्मू कश्मीर को अपने पुराने स्वरूप में वापस लाया जायेगा और धारा 370 को पुनः बहाल करने की दिशा में कार्य किया जायेगा। यह बयान तार्किक रुप से किसी भी राष्ट्र भक्त को तो नापसंद होगा ही साथ ही साथ संबंधित पक्ष के सभी राजनेता भी असहज महसूस करेंगे और ये बात गैर है कि लल्लो चप्पो की परिधि में घुमने वाले रागदरबारी बुद्धीजीवी अब इसी को महिमा मंडित करते नहीं थकेंगे।
विचारणीय हो कि कांग्रेस छोड़कर जाने वाले राजनेताओं से कांग्रेस तो कमजोर हो ही रही है , बी जे पी ज्वाईन करने वालों से बी जे पी का भला हो सकता है , उस राजनेता का भला हो सकता है लेकिन देश का भला तो मजबूत विपक्ष से ही संभव है जो वर्तमान में ऐसा विपक्षी धडा दिख नहीं रहा है। धन्यवाद्
नीतू कुमारी
संगीतज्ञ सह समाजसेवी
दुमका - झारखंड
814101