दिल्ली दिल वालों की है-यह फिर से साबित कर दिखाया दिल्ली वासियों ने और अपने प्यार का इजहार खुल कर किया अरविंद केजरीवाल जी के लिए, इस प्यार भरे मौसम के वैलेन्टाइन ङे वीक पर और केजरीवाल जी कह पा रहे हैं 'लव यू दिल्ली'।
चुनावी संघर्ष में आरोप प्रत्यारोप और बदजूबानी तो अपनी पारंपरिक पहचान सा बना लिया है ,लेकिन अगर केजरीवाल मंच से अपने चीर परिचित अँदाज, 'इंसान का इंसान से हो भाईचारा यही है पैगाम हमारा' के जगह पर अगर हनुमान चालीसा पढते नजर आवे और यह कहते हों कि मैं हनुमान जी का भक्त हूँ तो दिल्ली चुनाव की दिशा कुछ सीमा तक जरूर एक नयेपन का आभास करा रही थी और बी जे पी को तथाकथित एक मात्र हिन्दुवादी खैवनहार के पद से धकेलती दिख रही थी।
संपूर्ण चुनावी रैली मे राष्ट्र महत्व के मुद्दे को बी जे पी ने जोर-जोर से उठाया और तीन तलाक, धारा 370, राम जन्म भूमि, जैसे महत्वपूर्ण ज्वलंत मुद्दों पर अपनी पीठ थपथपाती रही, जिसे दिल्ली के जनता ने सिरे से खारिज किया । चूंकि दिल्ली वालों को स्थानीय मुद्दों पर ही सभी पार्टी के विचारों को जानना था ,और उस अपेक्षाओ के प्रति बी जे पी ने कभी भी गंभीरता नहीं दिखाया ।
शाहीन बाग को बीजेपी ने साम्प्रदायिक रंग में रंगकर अपने पक्ष में करने का हरसंभव प्रयास किया लेकिन दिल्ली विधानसभा के बहुसंख्यक हिन्दू वोटरों ने बी जे पी के इस चाल को भी असफल किया ।
बड़े पदधारी नेताओं से पब्लिक को उनके मर्यादित आचरण की भी बहुत अपेक्षा रहती है और एक तरह से उनकी भाषायी व्यवहार अनुकरणीय होता चला जाता है, इस बिन्दु पर भी बी जे पी और काँग्रेस दोनों ने ही ललकारते हुए भाषायी मर्यादा की सीमा रेखा लाघं दिया ।
अखिल भारतीय स्तर पर '#पुराने पेंशन बहाली हेतु संचालित आन्दोलन' और ईस हेतु बी जे पी नीत सरकार का उदासीन रवैया तथा केजरीवाल सरकार द्वारा आँदोलन को अपने समर्थन से लगभग शत-प्रतिशत सरकारी कर्मियों का मत बीजेपी के विरोध में जाने से भी बहुसंख्यक मतदाता का एक समूह 'आप' के साथ दिखा।
केजरीवाल सहित आप पार्टी के सभी चेहरों द्वारा लगभग मर्यादित भाषा के सीमा रेखा का ध्यान, विवादित मुद्दों पर संतुलित बयान देने से बहुसंख्यक मतदाता उनकी ओर ही शुरू से दिखे थे जो परिणाम तक बने रहे।
बिजली बिल, पानी बिल , मोहल्ला क्लीनिक, सरकारी विधालय का उन्मुखीकरण, अवैध कलानियो का नियमितकरन, जैसे मुद्दों पर आप पार्टी ने शुरूआती दौर से ही जन जन तक अपना संवाद कायम करने में सफलता पायी। हरेक विधान सभा चुनाव के अपने मुद्दे होते हैं और दिल्ली को जो चाहिए था वही केजरीवाल जी ने प्रमुखता से सबके सामने रखा और भविष्य में इनके प्रति अपने योजना को भी बताया ।
परिणामस्वरूप दिल्ली विधान सभा की सबसे नयी राजनीतिक पार्टी आप ने दिल्ली विधान सभा में ना केवल हैट्रिक जीत दर्ज करायी अपितु विपक्षी पार्टियों को अपने मजबूत रणनीति के तहत लगभग धाराशायी सा कर दिया । इसलिए इनका खुश होना ,अपने जीत पर गौरव करना और तमाम अन्य राजनीतिक पार्टीयों को काम करने के अपने पारंपरिक तौर तरीकों पर पुनर्विचार करने की जरूरत को इंगित करता है।
काँग्रेस खुश इसलिए है कि, बी जे पी सत्ता से बेदखल हो रही है, लेकिन अपनी हार के चिन्तनीय पहलू पर विचार करने के बजाय पर्दा डालती दिख रही है। बी जे पी भारतीय राजनीति के सर्वोच्च संसाधन युक्त पार्टी होकर भी , अमित शाह और नरेन्द्र मोदी जी जैसे सफल रणनीति कार के पुरे जोर शोर आजमाईश के बाद भी अगर चुनाव हार जाती है , तो निश्चित रूप से उनके लिए गहन चिंतन का विषय है ,और परिणाम स्वरूप जनता के हित हेतु नये नये आयामों पर विचार होना निकट भविष्य में दिखना संभावित है, लेकिन इतने बड़ी हार के बावजूद भी बी जे पी के लिए खुश होने वाले जो तथ्य हैं वह यह है कि उनके चीर परिचित राजनीतिक प्रतिद्वन्दी काँग्रेस यहाँ से भी गायब होता सा दिख रहा है ।
सादर धन्यवाद्
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