राजनीतिक भाषा --- राजनेता ही जाने
नियोजन नीति--2016 के तहत चयनित शिक्षकों की सेवा खतरे में है । माननीय उच्च न्यायालय रांची के बृहत्तर खंडपीठ ने किसी भी नौकरी और भु क्षेत्र के लिए शत प्रतिशत आरक्षण को असंवैधानिक बताते हुए , झारखंड सरकार --(जे एस एस सी) द्वारा चयनित और कार्यरत (सिड्युल्ड--13 जिले के इस वर्णित नियोजन नीति पर) शिक्षकों की नौकरी को गैर नियमानुकूल मानते हुए क्वैश कर दिया है।
कई एक मित्रों का मानना है कि यह बिल्कुल सही है । माननीय न्यायालय के निर्णय पर टिका टिप्पणी का दायरा बहुत सीमित होता है---- और संक्षेप में कहना चाहूंगा यह सही भी है------!
यह निर्णय सही है--- , नियोजन नीति भी तो कल परसों तक सही ही था -- क्योंकि इसे व्यापक प्रक्रिया अपनाकर कैबिनेट सहित विधानसभा में पास कराया गया होगा इसके बाद राज्यपाल महोदया द्वारा हस्ताक्षरित करते हुए, सभी आवश्यक वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन करते हुए ही उस समय लागु किया गया होगा।
लम्बी वैधानिक प्रक्रिया के बाद पदों का सृजन और इसके बाद विज्ञापन फिर बहाली। यानि की हरेक स्तर पर कानुनी प्रक्रिया का अनुपालन सुनिश्चित किया जाना जरुरी होता है।
लोकतंत्र के शासन संचालन में सरकारी पक्ष और विपक्ष दोनों की कमोबेश समान भुमिका होती है और जनता के हक में संतुलित व्यवस्था संचालन इन दोनों की समान जिम्मेदारी।
आज हमारे माननीय मुख्यमंत्री जी जो बहुत ही संवेदनशीलता के साथ इस मुद्दे पर यह कह पाये--- कि पिछली सरकार द्वारा राज्य को 13 और -11 जिलों में शिड्युल और नन शिड्युल के तहत दो भागों में बांटने की साज़िश थी उसे कोर्ट ने विफल कर दिया है।
मुख्यमंत्री जी हम गैर राजनीतिक जनों को भाषायी संकेत में जाने की कोई आवश्यकता नहीं है --- न ही उतनी समझ है। लेकिन उनसे समान्य जनों की नाराज़गी और आपमें बेहतरी को देख कर ही राज्य की जनता ने आपको अपना मुखिया चुन लिया है।
अगर नियोजन नीति गलत है तो फिर इस गलती की जिम्मेदारी आप पर भी है।आप उस समय विपक्ष में रहते हुए इसे पास कैसे होने दिये---! आप अपने इस जिम्मेदारी से भाग नहीं सकते हैं --- हेमंत भैया ---।
आप तो नौकरी देने और स्थानीयता को वरीयता जैसे मुद्दों पर जनता से भोट मांगे थे--- झारखंड की जनता को यह बात प्रमुखता से याद है , उम्मीद है आप भी इसे नहीं भुले होंगे।
व्यवस्था के तहत शिड्युल्ड एरिया में सिर्फ उसी जिले के स्थायी वासी आवेदक थे --- और नौकरी कर रहे हैं।
ऐसे में आप द्वारा झारखंडी को दिये गये अश्वासन का ही पालन उपरोक्त व्यवस्था में हो रहा था।
फिर पिछली सरकार के जिम्मे आरोप मढ़कर आप अपनी जिम्मेदारी से कैसे उन्मुक्त हो सकते हैं---!
चलिए हम सभी मानते हैं यह नियोजन नीति गलत है-----
तो फिर इस नियोजन नीति बनाने वालों को क्यो नहीं दण्डित किया जाय--?
जिम्मेदारी तो तय होने ही चाहिए ।
अब कोई ये भी समझा दे कि इस हेतु शिक्षक कहां और कैसे हैं जिम्मेदार---?
आपने विज्ञापन निकाला --- सभी अहर्ताओं को पुरा करते हुए इसने जगह सुरक्षित कराया । आज के दिन में कई शिक्षक अपने पुराने नौकरी को त्याग कर आये हैं --- ,इस नोकरी के आधार पर बैंक से लोन लिये हुए हैं-----
इसमें चयनित शिक्षकों की गलती कैसी---? इन्हें योग्यता पर आपने नौकरी दिया है --- ये योग्य हैं ---आपने इसे सफल अभ्यर्थी के रुप में सत्यापित किया है---- तो फिर -------
जो अयोग्य थे ,जिसने नियोजन नीति बनाई थी, उस पर कार्रवाई न करके --- जिम्मेदारी तय न करके, नीति को बनाने में शुन्य भुमिका निर्वहन करने वाले इस नीरिह शिक्षकों पर शासन का और माननीय न्यायलय का डंडा कैसा --- बिल्कुल एक अनुत्तरित सवाल है।
याद रखिएगा यह शिक्षक किसी मंत्री और सचिव के घर का बेटा बेटी नहीं हैं -- ये सभी अधिकतर मध्यम और निम्न मध्यमवर्गीय परिवार के सदस्य हैं --- हमारे आपके घर आंगन के ही बेटा और बेटीयां हैं --- जिसका वर्तमान अन्याय के मजबूत हथौड़ा से पीटा जा रहा है।
मैं अपनी पुरी निष्ठा के साथ इन शिक्षक भाई --बहनो के लिए अपने मुख्यमंत्री जी से और माननीय उच्च न्यायालय रांची से गंभीरता पूर्वक न्याय और दया की गुहार लगाता हूं--- पुनर्विचार का अनुरोध करता हूं और हार्दिक सदभावन व्यक्त करता हूं----और आप-----?
पवन मिश्रा
दुमका
No comments:
Post a Comment