सत्य
कभी सोच न पाया था
सच को सच बोलना
तथ्यों को जगजाहिर करना
इतना भी कठीन हो जायेगा
सच के साथ बेबाकी से कलम चलाना
यह भी किसी खास को आहत पहुंचायेगा
सत्य चहेरा छिपाता जगह तलाशेगा
और असत्य की काली चादर
चहुं ओर फैलेगी
पीतल चिल्लाता शोरगुल मचा रहा है चौबीस कैरेट टंच सोना होने का दावा दिखा रहा है
और सोना -- बड़ी मुश्किल से
शरणागत हो अपनी इज़्ज़त बे आबरू होने से--
अपने आप को बचा पा रहा है।
चमकता पीतल
इस कदर कोहराम मचायेगा
की सोने की आवाज और चमक
दर बदर गुमनाम होता दिखेगा
कभी सोच न पाया था
सत्य कह रहा हूं,
कभी भी ऐसा
सोच न पाया था ।
-- पवन मिश्रा
दुमका-- झारखंड
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