किस कदर जी रही हूं
किस किस को बताऊं
भुखे गरीबों की जिंदगी
तंगहाल बनाती
नेताओं पर हूं बेअसर
गरीब मुझे महसूस करते अकथ
रोजी रोटी में ही थक सो जाते
हां पहले मैं डायन थी
अब बनी प्रेमिका
रंग बदलू व्यवहार पा
मैं मदमस्त हो छा गई
चुम गई
बाजारु हर चीज को
हां मैं आज की मंहगाई हूं
हां मैं आज की मंहगाई हूं
--- पवन मिश्रा
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