मेरे दोस्त
बहुत कुछ लिखा जाना बांकी है अभी
फिर लगता है कभी कभी युं ही
बचा ही क्या अब--? जो लिखूँ--!
मेरे दोस्त मैं हैरान हूँ
मेरे लेखन के दुनिया की
मेरे कल्पना के दुनिया की
सबसे लंबी कविता तुम हो दोस्त
सबसे लंबी कहानी भी तुम ही हो दोस्त
वो कहानी और वो कविता
जो लिखा न जा सका
जिस भाव को अभिव्यक्त करने को
कोई शब्द न मिल पाया हो
वो भी तो तुम ही हो
तुम मेरे दुनिया की वो सबसे बड़ी खुशी हो
जिससे समुची दुनिया अनजान है
हाँ ये भी सच है
उसी अनजानी दुनिया का एक अंश हो तुम
और तुम भी अनजान हो दोस्त
मेरे भावनाओं से मेरे प्रकृति से
ये दोस्त--दोस्त का खेल
ये ईश्क विश्क का खेल
और हर पल
खेल खेल मे लिया गया परीक्षा
औलंपिक खेल के फाईनल की हार
पढा़ई के परीक्षाफल की हार
से भी ज्यादा घातक हार होता है
उन दोस्तों का घात
दोस्ती के पौधों ने
कभी जमीन पर जडें न फैलायी
हर पल दिल और भावनाओं मे ही
मचलता रहा फैलता रहा रग रग में
मेरे दोस्त तुझे पता होने चाहिए
एक असल मित्र को खोजना बहुत कठिन होता है
उसे छोड़ देना बेहद ही मुश्किल होता है
और उसे भुल जाना नामुमकिन
अगर तुझे कोई भुल गया छोड़ दिया
तो वो दोस्त था ही नहीं
फिर क्यों विलाप --!, कैसा विषाद --!
दोस्ती हो तो अटुट बंधन वाला
कृष्ण सुदामा वाला
राधा कृष्ण जैसा
धन्यवाद
(पवन मिश्रा दुमका झारखंड)
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