Sunday, June 16, 2024

झूठ सबसे बड़ा झूठ *****************

झूठ सबसे बड़ा झूठ
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छुट्टी समाप्ति पर
इस रविवार की शाम जैसे ही 
मैंने झुककर मम्मी-पापा के पैर छुए  
किये प्रणाम और निकल पड़े
अपने काम पर ---

रास्ते भर सताता रहा 
मेरे मानस पट पर चलता
अपशकुन की कालीमा

 इनके चेहरे कि झुर्रीयां
पिला पड़ रहा चेहरे कि चमक
 हाड़ मांस को छोडती झूलती त्वचा
शरीर की दूर्बलतम काया
थका थका सा चेहरे का संकुचन,
और इस  परिस्थिति का अवलोकन‌ 
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महसूस करा रहा है
इन्हें है सख्त रूप से 
हमारे सहारे कि आवश्यकता
अवशेष जिंदगी में हमारे साहस-
हौसलों और हर पल के साथ की जरूरत ------

इसी से मिलेगा हन्हें
तृप्ति  संतूष्टि सुकून और चैन का एहसास----

इन सब को जानते हुए भी 
नहीं कर पा रहा हूं
अपने फर्ज और कर्त्तव्य का पुरा निर्वाह---

 एक संतान‌ होने के दायित्व को
जानता हूं ,जानता हूं ,----
हमारी क्या होनी चाहिए भूमिका -- लेकिन ----

जिंदगी की कशमकश -- 
भागमभाग--व्यस्तता और अनेकों लाचारी,- व्यक्त कराता है
सिर्फ संत्वाना के दो बोल--

 और बोल पाता हूं
कि जल्द ही हमलोग फिर मिलते हैं
चिंता मत करना
पापा और अम्मा अपना ख्याल रखना,

और ये हमारी खातिर बोल जाते हैं विश्व का सबसे बड़ा झूठ
 हमें खुश रखनें 
रूआंशे
स्वर में कंपकंपाते ओंठो से 
मद्धिम आवाज से -----

हम लोग ठीक हैं
अपना ख्याल रखना।

----- जरुर 

 और फिर कह जाता हूं
जल्द ही  मिलते हैं पापा अम्मा
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©पवन मिश्रा
दुमका - झारखंड
    814101

(माई मदर ऐट सीक्सटी सीक्स बाय -- कमला दास के अंग्रजी कविता की प्रकृति पर आधारित हिंदी कविता।)

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