कहानी ---
*बेनामी रिश्ता*
यह बैंक की नौकरी भी जीवन को अजीबो अजीब सा ऐहसास दिलाते रहती है . कार्यभार और स्थानांतरण हम बैंककर्मीयों को चैन की सांसे नहीं लेने देती . यह तो भगवान का लाख लाख शुक्र है कि लिली जैसी हमसफर मुझे मिला वरना मेरा क्या होता--! भगवान मालिक .
अभी अभी भागलपुर से बसंत बिहार मेरा स्थानांतरण हो गया था. देश की राजधानी दिल्ली में स्थानांतरण हो पाना बडे ही संयोग की बात है. चीर प्रचलित पुरातन कहावत है दिल्ली दिल वालों की है मतलब कि यहां के आदमी कुछ ज्यादा उदार होते हैं -- उदारता यहां आम जनों के व्यवहार में दिखता है.
सर्वशक्तिमान को स्मरण करते हुए मैं अपना डेरा भाडे के मकान में ले लिया जहां से बैंक नजदीक ही था. पडोस के मकान से एक स्नेह संपर्क सा जल्द ही हो गया और उनका ये हिदायत की किसी अनजान को मकान के अंदर प्रवेश से परहेज किजीएगा अपनी जिंदगी अपनी सुरक्षा.
एक दिन बैंक के कामों में मैं व्यस्त सा था तभी लिली हडबडाते हुए फोन की और बोल उठी नही आप किसी भी सुरत में यथाशिघ्र घर आईए . मैंने भी अविलंब आवश्यक औपचारिकताओं को पुरा करते हुए तुरंत घर पहुचा . घर में किसी अज्ञात महिला के साथ मेरी पत्नी बैठी थी और बडी असमंजस में थी.
वो महिला बोल रही थी -- मैं रास्ता भटक गई हूँ. ये भुलने की मुझे बहुत बडी बिमारी है और चौबीस से छत्तीस घंटे में मेरी याददाश्त कभी भी वापस आ जाती है. मैं मानवता के नाम पर थोडा मददस्वरुप आपके यहां शरण चाहती हूँ.
विचित्र परिस्थिति थी , मैं उनके साथ ही,सोफे पर आमने सामने बैठ गया और लिली को ईशारे में कुछ चाय पानी के लिए बोला. लिली ने सुंदर सुंदर राजभोग और एक एक गलास पानी एक ट्रे में लायी और विनम्रता से उस अनजानी औरत को पहले और फिर मुझे लेने को अनुरोध किया. भगवान भी इंसान के लिए बेवक्त परीक्षा की घंटी बजा देते हैं . एक साधारण इंसान को भगवान के लीला की क्या हो समझ --?
मैंने उनसे ढेर सारी तहकीकात किये . लेकिन कहीं से भी संशय के कुछ भी बोल समझ न आया. वो कहती रही बेटा कुछ समय पश्चात ही मैं स्वयं यहां से चली जाऊंगी. मुझ पर कुछ भी संदेह न करो. तेरे जैसे गृह गृहस्थी से भरा संसार रूपी कटोरा छोड मैं फकीर जैसे बन गयी हूँ, बेफिक्र रहो बच्चे
यह कहकर वह लीली के साथ आपसी सौहद्रता बढाते चली गयी. और चेहरे के भाव भंगिमा भी कुछ ऐसी अभिव्यक्ति सी दे रही थी , कि समान्य इंसान क्या कोई भी उसे डपट कर बाहर जाने को कह पाने की स्थिति में न आ पाये.
मैंने गेस्ट रूम से अंदर आकर बेड रुम में लीली को अवाज दिया -- लीली इधर आओ. लिली के सामने ही मैंने पुलिस को फोन लगाकर सारी सुचनाऐं दी. और फिर उस अनजान के पास बैठ गया ताकि पुलिस के आने से पहले वह भाग न जाय. बातों ही बातों में कुछ मुझे भी आत्मीयता सी उनसे होने लगी. लेकिन मैने खुद को चौकन्ना किया. अपने दयाभाव वाले अंदर की स्थिति को बाहर लब पर आने न दिया.
तभी पुलिस भी वहां पहुंच चुंकि थी .ढेर सारी छानबीन की गयी . जब याददाश्त छोड जाती है दिमाग को तो फिर अकेले क्यों निकलना.--? घर वाले की कैसी लापरवाही.-? अब वो महिला भी डरे सकपके सी थी . वो इतना ही कह रही थी , मुझ पर कोई संदेह न किया जाय , मैं चोरीन या षडयंत्रकारनी न हूँ .मैं कुछ समय पश्चात ही याददाश्त वापस आते ही स्वतः चली जाऊंगी. पुलिस की कडक अवाज और अंदाज से शायद वो महिला रोने ही वाली थी , थरथराहट तो स्पष्ट सी दिख रही थी. लीली ने मेरे ओर देखते हुए, पुलिस से कुछ बातें कहनी चाही. पुलिस हेड को मैंने अलग जगह पर आने को अनुरोध किया. पुलिस के अलग होते ही लीली बोल पडी सर क्या ये कुछ देर की जो भी सीमा हो उसको देखा जा सकता है-? , क्या जबरदस्ती इसे भगाने के अलावा कोई और उपाय है --? बाद में अनुनय विनय के पश्चात कुछ जरूरी सुरक्षा के मानकों को अपनाते हुए , कुछ निर्देश जारी करते हुए उसे यहीं मेरे घर पर रहने दिया गया.
वो महिला लीली से घुलते जा रही थी ,सभी घरेलू कामों को बिना किसी निर्देश के निपटारा कर दे रही थी. रात्री भोजन में उन्होने ही लिली से इजाजत लेकर केला कोफ्ता , मेरे पसंद के वयंजनों में से एक बनायी. वो स्वाद अवर्णनीय थी,. चटपट खट्टी मिठी स्वादों युक्त बेहतरीन स्वाद और नरम नरम गरम गरम रोटी , शायद ऐसी सुस्वादु व्यंजन मैंने पहले कभी न चखा हो -- बिल्कुल पुरे ईमानदारी से बोल रहा हूँ. मैंने भोजनोपरांत अज्ञात को गेस्ट रुम में ही सोने का इंतजाम कर दिया कुछ जरूरी निर्देशों के साथ . और लीली से इस पर पैनी नजर रखने को बोलते हुए कब सो गया ,मुझे पता नहीं चला. सबेरे छह बजे निंद खुलने के साथ ही मैने गेस्ट रूम की ओर देखना चाहा. वो वहाँ नहीं थी. मैं हडबडा सा गया , बाथरूम में भी वो नहीं थी .मेरी खोजी निगाहें ढेर सारे बुरे ख्यालों के साथ उसे ढुंढने लगी .
मैंने अपने सभी जगहों को देखा जहां नकद रूपये और जेवर जेवरात जैसे मंहगे समान रखे जाते थे -- वो सभी सुरक्षित थे. तभी ऐसा लगा जैसे कोई गेस्ट रूम से अंदर प्रवेश कर रहा हो. मैंने झट से देखा वो वही महिला थी ,हाथ में पत्तल के प्लेट बनाये और उसमें कुछ विविध प्रकार के पुष्प थे , जो देखकर ऐसी लग रही हो मानिए पुजन करने की योजना हो. वो बोल उठी बेटा मुझे याद आ गयी अपनी जगह, मैं अब चली जाऊंगी. वो फुल के पत्तल वाले प्लेट को पुजा रुम के आगे श्रद्धा से रखी.सारे घर में साफ सफाई , पोछा लगाने के बाद बाल्टि से पुजा रूम और तुलसी मंडप को बडे श्रद्धा से धो दी.
मैं उनके हरेक काम पर पैनी निगाह बनाये हुए था. तभी वो अंदर लीली को जगाने गयी और बोल उठी उठो बहु मैं अब जा रही हूँ मुझे अपनी जगह याद आ गयी है.
झटपट वो उठी और पुजा रुम और अन्य सभी जगह को देखकर खुशी के साथ बोल पडी इतनी मेहनत की क्या आवश्यकता थी अम्मा. वो बोल पडी आप पुजा कर लेना बहु मैं अब चली और वो निकल पडी.
मुझसे रहा न गया मैं बोल पडा, मैं आपको छोड दुंगा मेरे गाडी में बैंठें आप. वो असमंजस भरे स्वभाव से बैठ गयी. मैं उनके बताये रास्ते पर गाडी चलाते रहा .तीन नंबर वाली गली के समाप्ति के मोड पर संकिर्ण गली के पास वो रूकने को बोली. रूकते ही झटके के साथ वो उतर कर बगैर कोई बात किये वो चल पडी. मैं बीच रास्ते पर कार खडी न कर सकता था. सो पार्किंग के जगह तलाशते हुए गाडी लगाने में मुझे पांच से सात मिनट लग गये थे. मैं तुरंत ही उस रास्ते पर तीव्र गति से जा रहा था , जिस ओर वो महिला गईं थी . मुझे वह दिखाई न दे रही थी. लेकिन मैं बढते गया और बढते गया .कुछ दुरी पर ही एक टुटे से दरवाजे के अंदर महिलाओं की मंडली नजर आ रही थी . मैं अपने आप को छिपाकर दरवाजे के अंदर झांकने का प्रयास किया. समझते देर न लगी यह एक वृद्धाश्रम है , जहां मेरी आंखे उसे देख रही है. वो हंसते हंसते बोल रही है -- मैंने बहुत बडी गलती की है कल , झुठ बोल के बहुत बडा पाप किया है मैंने. मैं एक अनजान के घर घुस गयी , बोल गयी कि मेरी याददाश्त खो गई है मुझे कुछ समय में याददाश्त वापस आ जायेगी और मैने वहाँ शरण ले लिया काफी मशक्कत के बाद. मै बेटा पोतहु और घर वाली जिंदगी जी करके आई हूँ, ईश्वर का धन्यवाद मेरे पाप अब वो ही माफ करना .मुझसे रहा न गया. मैं अंदर प्रवेश करके उनके हाथ पकड लिये और बोल उठा किसने कहा आपने झुठ बोला है , पाप क्या होता है --?- मैं ही हूँ आपका बेटा आज से आप मेरे साथ रहेंगी . इस बेनामी रिश्ता को क्या कहेंगे आप --? कोई बच्चे को तो गोद लेता ही है ,क्या कोई मां की भीआंचल ला पाता है --?
©®पवन मिश्रा (दुमका-झारखंड)
30दिसंबर 2023
No comments:
Post a Comment