प्यार करना नही है पाप
कभी कभी मैं हो जाता हूं मायुस
हो जाता हूँ ओझल जगवालों से
लापता हो जाता हूँ अपने घर से
अपने किरदारों से भी हो जात हूँ गुम
लोग ढुंढते थक जाते हैं
मैं रणछोड इश्क नहीं हूँ
मैदान को पीठ दिखा
भागना मुझे पसंद नहीं
बेवफ़ाई का ठप्पा
मेरे मैयत पर लगाने वालो
पुछना जगवालों से
पुछ लेना मेरे
कहानी कविताओं से
और पुछ लेना मेरे चाहने वालों से
जब लंबे समय तक न मिल पाऊं
तो मेरा संदेश बतला जाना सबसे
प्यार करना नही है पाप
प्यार किया तो होना होगा
जगवालों से ओझल
कहना होगा अपनी बातें
छुप छुपकर
कभी कविताओं में
कभी कहानीयों मे
तो कभी मेरे वह मौन
जो कभी फिर लब न खोल पाये
नेपथ्य से हमारी आत्मा को सुनना
चिल्लाता आवाज देता मिलेगा
प्यार करना नही है पाप
जगवालों ऐसा तुम सुनना जरूर.
प्यार के पहरेदारों को मेरे जाने बाद
तु बतलाना जरूर
प्यार करना नहीं है पाप
©®पवन मिश्रा
16-12-2023
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