Saturday, June 15, 2024

(16)कहानी -- बहकती सोच

कहानी
                    *बहकती सोच*
मंदार हिल के तलहटी में बसे मेरे पैतृक गांव नैमतपुर से ढेर सारे सुंदर सुंदर सुखद अनुभव को लेकर मैं विक्रमशीला एक्सप्रेस के कोच संख्या ऐ सी वन के बर्थ नंबर तैईस और चौबीस पर लिली के साथ सवार होकर दिल्ली को निकल पडा था. दिल्ली से कैलिफोर्निया  के लिए इंडियन ऐयर लाईंस के एक्सक्युटिव क्लास में लिली के पी ए ने टिकट  बुक कराकर आवश्यक कामों से जल्द ही वापस आने का अनुरोध किया था. लिली का यह नैमतपुर जैसे गांव के समृद्ध परंपरा से लबरेज जगह पर जीवन में पहली बार आना हुआ था.

                         सुंदर सुंदर बातों और रमणिक वादियों को पिछे छोड रेल अपने ही धुन में चलते जा रही थी और मैं  पेटु की तरह इंतजार कर रहा था कि लिली इच्छा जाहिर करे. तभी आग की भट्टी पर सेंका हुआ लिट्टी, गरज गरजकर बेचता हुआ , जमालपुर स्टेशन पर दिखा. ओह मैं कहां जो रूकने वाला था - भाई लिट्टी के साथ सरसों या राई की  चटनी दिख जाय तो मैं अपने आप को रोक नहीं  सकता , सो मैंने चार -चार ,लिट्टी , राय की चटनी ,बैंगन भरता ,आलु चोखा , प्याज की कतरन , हरी हरी मिर्च ,दो प्लेट में लेकर अविलंब  अपने बर्थ पर पहुंच गया.
         गेरुवा वस्त्र पहने एक कमंडलधारी मेरे दाखिले से पहले ही सामने वाले 36 नंबर के बर्थ पर सवार हो गया था. लिली इस कमंडल धारी साधु को देखकर बडी असहज हो गई . वो कान में बुदबुदायी कैसा असभ्य है ये मानव . (हाउ केन ही डेयर टु ऐभल इटस फेयर---) कैसे इस आदमी ने इस मंहगे कंपार्ट का भाडा जुगाड कर पाया , असभ्य है ये. ये जरूर किसी जजमान को  चुना लगाया होगा--,ये ही भगवा आतंकवाद है. -- वगैरह वगैरह वो बोलती रही और मैं सुनता रहा -- मैं कर भी क्या सकता था--!. लिट्टी का मजा फीका हो चुका था. यद्धपि मैंने प्रयास किया कि ऐडजस्ट करो कोई उपाय नहीं है, लेकिन लिली के बकर बकर ने मेरा ही कान पका दिया था. मैनें उस साधु से रिक्वेस्ट किया कि कुछ पैसा ही ले लें और आप अपना बर्थ किसी और जगह ऐडजस्ट करा लें थोडा हम दोनों आपके सामने असहज सा हो गया हूँ.  शायद वो साधु सब समझ रहा था और वो बोल पडा रिलेक्स रहो  बच्चा ,  नैमतपुर की मिट्टी तो ऐसी नहीं है --! यह कहकर वह मंद मंद मुस्कान के साथ चुप सा हो गया मानिए , ढेर सारी बातें वो अपने चेहरे के भाव से कह गुया हो.
         किऊल जंक्शन में ही दो काफी स्मार्ट और भद्र युगल दंपति कोर्ट- पेंट और जींस टाप में सवार हो लिये और संयोग से वो आमने सामने बेठ लिये. हम दोनों ने ही मुस्कराकर उनका स्वागत किया . कुछ मिनटों में ही हम लोगों ने बातों का सिलसिला शुरू किया और अपने को भगवा आतंकवाद के असहज माहोल से निकाल पाया. लिली भी थोडा अच्छा महसुस कर रही थी.
              पटना से गाडी खुल चुकी थी , तभी उस सज्जन ने बडे विनम्रता से केक निकाला और अपना शादी सालगिरह सेलेब्रेट किया . हम सब को भी स्नेह और प्यार के साथ केक परोसा गया ,  तथा साथ में ही उस साधु को भी. 
          इसके बाद की बातें मुझ कुछ भी याद नहीं.  मैं लिली संग किसी आज्ञात हास्पीटल के आमने सामने के बेड पर था. मैं लिली को और लिली मुझे निहार रही थी. शरीर बेजान सा हो गया था. लग रहा था जैसे मैं गहरी निंद से जग पाया हूँ.  तभी मेरे सामने वो साधु दिखे और बडे ही सहज मुद्रा में मेरे बगल में खडे थे.
साधु बोल रहा था -- वो शादी सालगिरह सेलेब्रेशन वाली केक मुझे भी मिला था ,मैंने खाया नहीं उसे कमंडल में डाल दिया था. उसमें जहर था . वो अनजान दंपति नशाखुरानी गिरोह वाला था. आपलोग घबरायें नहीं आपके सारे समान लखनऊ रेलवे पुलिस  के लाकर रूम में है , और वो दंपति पुलिस कस्टडी में.
     एक बात सोचना जरूर बच्चा, खाली कटोरा देख ये मत सोच लेना कि कोई भिक्षा मांगने आया है , हो सकता है वह सबकुछ दान करके  चैन की सांस लेना शुरू कर रहा हो. नैमतपुर की मिट्टी की खुशबू कलंकित होने से बचाना , मैं उसी मिट्टी से निकला फकीर हूँ. अगर सच में कोई साधु , फकीर ,मौलाना और पादरी   है तो वह हर पल मानवता की रक्षा करने वाले ही होते हैं और सच झुठ तो आप बुद्धिमानों को फर्क करने हैं.
©® पवन मिश्रा (दुमका-झारखंड)

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