Sunday, June 16, 2024

कविता अंतिम माया

कविता
              *अंतिम माया*
 मैं  लिख नहीं पाया कभी अपनी अंतिम कविता
अपनी भावनाओं के दे नही पाया कभी वो 
अंतिम शब्द 
तुझसे बातें खतम होने के बाद भी नहीं होती
मेरी इच्छाऐं संतृप्त
घंटों घंटों भर की बातों बाद भी रह जाती है
कुछ स्मृति शेष
ठीक वैसे जैसे पृथ्वी पर खिले अंतिम फुल भी
छोड जायेंगे पृथ्वी के कोख अपनी बीज

लिली जब जीवन की चल रही होगी आखिरी  गुंज 
तेरे कंधे पर मेरा मस्तक दुनिया छोड अलविदा 
कहता मिलेगा , जाने क्यों -?
शायद तब भी  बनी रह जायेगी ये आश ये
जीवन तेरे साथ की आखिरी जीवन न हो.
©®पवन मिश्रा (दुमका-झारखंड) 






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