Friday, June 28, 2024

(3)*गलत कौन--? *

                   गलत कौन---? 

ये जो बाप का प्यार होता है न बेटा
वो हर प्यार का बाप होता है ------। 
                       ये कारपोरेट की नौकरी भी न आदमी को अति उपयोगितावादी बनाने मे कोई कोर कसर नही छोडता है। अमुमन ये उपयोगितावादी सोच सरल और दयालु ह्रदयवान आदमी के लिए कयी एक परिस्थितियों मे बडी असहज परिदृश्य को लाती है। 
         छैल छबीली महानगरों मे पली बढ़ी लडकी से अगर इलु इलु वैसे लडके को हो जाय जो अभी अभी कारपोरेट की नौकरी मे महानगर मे पदस्थापित हुए हों तो तत्क्षण जिंदगी  बडी हसीन और रंगीन लगती है और शादी उपरांत जिंदगी मे यही हसीन और रंगीन तथ्य पुरे जिंदगी को डिस्को कब बना जाती है पता ही नहीं चलता --! 
     मैं (प्रेम) और मेरी पत्नी (स्वघोषित) विश्वसुंदरी -- अन्नो ,लंबे समय बाद अपने पैतृक घर मनेर को आ रहा हूँ --माँ पिता के बगैर यद्यपि अब वो घर --घर ही कहाँ रहा --?, लेकिन जन्मभूमि की याद भला कौन है--!, जिसने मन से निकाल पाया --? अन्नो काफी उत्सुक थी क्योंकि वो पहली बार मनेर आ रही थी -- बट मेरी मनोदशा-- मानो माँ और पापा का चेहरा ही मानसिक पटल पर छाये हुए  था--और चुपचाप मैं उन्हें अपनी सोच में देख रहा था --! 
                    मैं घर घुसते ही रज्जो दादु के पैर छुये और उनको कहा -- दादु गाडी मे कुछ समान हैं उसे अंदर लेते आईए--! 
            प्रेमु तु कैसा है ---! कहकर रज्जो गाडी से समान निकालने लगा,  एक बडा सा भारी भरकम लगेज  को देखकर रज्जो बोल पडा प्रेमू ये वाला समान तो काफी भारी है इधर तुम पकडो उधर मैं पकडता हूँ -- और ले चलता हूँ अकेले मुझसे नहीं हो पायेगा --! 
     हाँ दादु चलिए कहकर आपसी सहयोग से उन दोनों ने सारे समान उतार घर के अंदर किये ---। 
      तभी अन्नो बोल पडी -- प्रेम तु इधर आओ --! जल्दी से आओ --! अन्नो (प्रेम)  मुझको हाथ पकडकर एक कमरे मे ले आयी -- और बली ---
    प्रेम  तुम्हारा ये दादु नौकर है न ---!   मैं बोला --हां। 
तो फिर क्या ये दादु दादु लगा रखा है। उसका पैर क्यों छुआ तुमने--!  मैं बोल पडा -- तो क्या हुआ तुझे नहीं पसंद तु नही छुना --बात खतम।  
     तभी अन्नो बोल उठी -- क्या व्यवस्था बना रखी है तुमने प्रेम
-- इस बुढ्ढे से क्या काम होगा  अब ---! अब इस उम्र में इनसे अपना शरीर संभलता नहीं ये क्या करता है यहाँ रहकर ---! 
  मेरा मानो इसकी अभी छुट्टी कर देते हैं --! 
ओहहहहहह हो रूक भी जाओ न अन्नो --! इतनी जल्दबाजी क्या है --! 
       नही होगी तुझे कोई जल्दबाजी--! हम नौकर को पैसा देते हैं  और बदले मे उनसे काम लेते हैं ।  पैसा कोई खैरात मे नही आता है प्रेम--! यहाँ हम रिश्तेदारी दादु और काकु बनाने के लिए नौकर के नामपर इसे नही रख सकते चलो उस बुढ्ढे को बुलाओ और छुट्टी करो उनकी ---! 
         बगैर कुछ सोचे अन्नो ने रज्जो को अवाज दी --- ऐ सुनिए आप -----! 
तभी रज्जो अपने हलके कदमों से कमरे मे प्रवेश किया और बोला जी बिटिया बोलो ---
     ‌‌ अन्नो का तेवर सातवें आसमान पर था --
          ऐ क्या ये कभी बिटिया --! कभी बहु --! ये क्या लगा रखा है, मैं तेरा बिटिया या बहु नही हूँ--- मुझे मैम  साहिब पुकारा कर---! तु नौकर है न ---! 
   बात बढता देखकर मै (प्रेम) ने अन्नो का हाथ कसकर दबाया और उसे चुप रहने को कहा ---! 
  मैने कहा -- दादु आप अपने गांव कितने दिन से नहीं गये हैं, अभी कोई संपर्क है वहाँ आपके --?आप जाईये न थोडा घुम वुम लिजिएगा अपना घर --! 
   कैसे जाऊंगा प्रेमु यहाँ इतने काम बिखरे पडे हैं -- तु लोग इतने लंबे समय के बाद यहां आ पाया है -- यहाँ का काम छोडकर कहाँ जाऊं --! नहीं नही बोलते रज्जो गंभीर हो गया --! 
     तभी अन्नो बोल पडी और हां अपना हिसाब विसाब कर लिजिए सब तुरंत नकद दे देती हूँ -- आप से भार नहीं उठाया जाता, आप की उम्र अब काम करने की नही --आप एकाध घंटे मे निकल लिजिए---। 
      मानो रज्जो दादु के शरीर पर हरेक रोंगटे खडे होकर यह कह रहा हो सत्य यही है ---!   रज्जो कम बोलने वाला आज अपने मन मष्तिष्क पर बेकाबु हो चुका था---! 
और बोलने लगा
   बहुत धन्यवाद बहु --ननननननननननननन भेरी शारी
मालकिन आपने होश दिलाया कि मैं नौकर हूँ इस घर में मेरी हैसियत को आपने याद दिलारा आपका शुक्रिया---! 
 आप मेरा हिसाब करेंगे---! कर पायेंगे मेरा हिसाब आप ----! 
तो सुनिए ---
   बीसो़ं साल -पहले , मैं बाबुजी (आपके श्वसुर)  के कहने पर अपना गांव घर सबकुछ छोडकर आ गया इस घर में और इसी को अपना घर मान लिया --!  बाबुजी ने आश्वस्त किया था  रज्जो अब तुझे यहीं रहना है --ये घर तेरा है -- मृत्योपरांत तु कहीं   नहीं  जायेगा। मालकिन आपके शसुर  अस्वस्थ थे मैं हर रोज प्रेम को इसी कंधे पर बैठा कर दुर दुर तक घुमाने का काम किया और प्रेम को ही अपना बच्चा माना --! और यह कंधा अब सही में नाकाम हो गया मालकिन -- अब ये किस काम का--! 
और प्रेमु नहहहह न --- भेरी शारी--- मालिक मेरे मालिक
सुनिए --
""ये जो बाप का प्यार होता है न बेटा
वो प्यार हर प्यार का बाप होता है "---खैर
    और सुनना चाहेंगे मालकिन --  ये जो मैं भार नहीं उठा पाता हूँ न यह मेरी उम्र का असर नही है--
मैंने अपना किडनी बाबुजी यानी तेरे शसुर  को दिया था और तब से मुझसे भार नही उठाया जाता है -- मालकिन
मालकिन ------अअअआआआआननन हहह
  कहते कहते रज्जो पसीने से तरबतर हो चुका था जमीन पर लुढक कर वो ढेर हो चुका --और रज्जो जा चुका था अपने गंतव्य को --- अब रज्जो फिर नही आ पायेगा कभी 
©पवन मिश्रा --दुमका झारखंड
 


   

       
   
           
      

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